ज़्यादातर किसान सबसे पहले दूध में फ़र्क़ देखते हैं। पशु 8 लीटर दे रहा था, अब 6 लीटर दे रहा है। फिर ध्यान आता है कि वो बार-बार बीमार पड़ रहा है, heat में देर से आ रहा है, और शरीर पहले जैसा मजबूत नहीं लग रहा।
ये तीन अलग-अलग समस्याएँ नहीं हैं। ज़्यादातर मामलों में ये एक ही बात के तीन संकेत हैं: पशु को ज़रूरी mineral नहीं मिल रहे।
1. बिना वजह दूध घटना
दाना वही है, पानी ठीक है, कोई बीमारी नहीं, फिर भी दूध लगातार कम हो रहा है। Calcium, phosphorus और zinc जैसे mineral सीधे दूध बनने में काम आते हैं। जब ये कम पड़ते हैं, सबसे पहले असर दूध पर दिखता है।
2. बार-बार बीमार होना
छोटी-छोटी बीमारियाँ बार-बार होना, ठीक होने में समय लगना, बाल रूखे दिखना। Zinc, copper और selenium जैसे trace mineral immunity को support करते हैं। इनकी कमी में पशु हर बीमारी से देर से उठता है।
3. शरीर कमजोर होना
कूल्हे की हड्डी दिखना, खाल रूखी होना, दाना खाने में सुस्ती। ये संकेत किसान सबसे बाद में पकड़ते हैं, क्योंकि ये धीरे-धीरे होता है, लेकिन सबसे साफ़ यही है।
हरा चारा अकेले क्यों काफ़ी नहीं
आम धारणा है कि अच्छा हरा चारा मिल रहा है तो और कुछ ज़रूरत नहीं। हक़ीक़त में चारे में mineral उतना ही होता है जितना उस मिट्टी में था जिसमें वो उगा। बिहार और गंगा के मैदान की बहुत सी मिट्टी में zinc और copper कम है। इसलिए दो किसान एक ही चारा, एक ही मात्रा में दें, फिर भी पशु को मिलने वाला mineral अलग हो सकता है।
यही वजह है कि organised dairy में mineral mixture रोज़ का खाना माना जाता है, बीमार पशु की दवा नहीं।
क्या करें
रोज़ chelated mineral mixture से शुरुआत करें। Chelated mineral amino acid से जुड़े होते हैं, जिन्हें शरीर साधारण mineral salt से बेहतर absorb करता है, यानी उतनी ही मात्रा से ज़्यादा फ़ायदा। बड़े पशु के लिए रोज़ लगभग 50 ग्राम, दाने में मिलाकर, सामान्य maintenance dose है।
अगर पशु ने हाल में बच्चा दिया है, या हड्डियों की मजबूती और भूख की चिंता है, तो mineral mixture के साथ liquid calcium + AD3 देना absorption में मदद करता है। Vitamin D3 के बिना शरीर calcium का पूरा उपयोग नहीं कर पाता, इसीलिए दोनों एक साथ बनाए जाते हैं।
कोई भी बदलाव कम से कम 30 से 45 दिन दें, तब असर आँकें। Mineral की कमी एक हफ़्ते में पूरी नहीं होती।
Vet डॉक्टर को कब बुलाएँ
Supplement पोषण में मदद करते हैं। ये इलाज नहीं हैं। अगर पशु दाना बिल्कुल छोड़ दे, बुख़ार हो, लंगड़ा रहा हो, या दूध का रंग या गंध बदल जाए, तो ये vet का मामला है। पहले डॉक्टर को दिखाएँ, पोषण को लंबी अवधि का काम मानें।
केवल पशु आहार पूरक के रूप में उपयोग करें। यह दवा नहीं है।